दिल्ली का प्रदूषण पर्व

दिल्ली में साल भर प्रदूषण का स्तर ख़तरे की सभी सीमाओं से कई गुना ऊपर रहता है| लेकिन दिल्ली वाले ठहरे आँख के अंधे कान के कच्चे| न कोई सही चीज आसानी से दीखे, न कोई सही बात आसानी से सुनाई दे| जब तक प्रदूषण से सूरज दिखना बंद न हो जाए तब तक दिल्ली वालों को प्रदूषण समझ नहीं आता| यह उच्चतम प्रदूषण भी दिल्ली वालों के लिए एक पर्व हो गया गया है| बच्चों की स्कूल से छुट्टी, अमीरी में कहीं बाहर घुमने निकल जाना, या एयरप्योरिफायर लगाकर घर में मस्त फ़िल्में देखना| अब तो यह सालाना जलसा हो गया है कि होगा ही होगा| दिल्ली सरकार और भारत सरकार इस पर्व पर कुछ मनोरंजक समाधान पेश करेंगे| यही सब है, और क्या?

वैसे तो प्रदूषण दिल्ली वालों की दीखता नहीं और दिख भी जाए तो हमारे पास बहुत सारे हास्यास्पद समाधान है| जैसे – पंजाब हरियाणा वाले पिराली जला रहे हैं हैं; दिल्ली के गरीब लोग कचरा जला रहे हैं; भवन निर्माण मजदूर धूल उड़ा रहे हैं| हद होती हैं दिल्लीपन की|

प्रदूषण का यह प्रदूषण उच्चस्तर दिल्ली से सामान्य स्तर प्रदूषण से २० से ३०% अधिक ही होता है| सामान्यतः दिल्ली का प्रदूषण स्तर ३०० होता है और दिल्लीवालों का प्रदूषण सहनशीलता स्तर ४०० होता है, जो वैज्ञानिक रूप से पर्यावरण की मृत्यु का परिचायक है| यह प्रदूषणस्तर दिल्लीपन को हास्यास्पद बनाता है| इस स्तर पर दिल्ली की जनता, राज्य सरकार और कभी कभी दिल्ली की भारत सरकार भी जग जाती है| यह जगना इस तरह का है कि कोई नशेड़ी नींद से जागकर नशे में बक बक कर रहा हो|

दिल्ली प्रदूषण के सामान्य प्रमुख कारक भी कम हास्यास्पद नहीं है:

  1. दिल्ली का स्थलमध्य होना: भारत के अधिकतर बड़े शहर समुद्र के काफ़ी निकट हैं, इसलिए प्रदूषण दिल्ली में फंस जाता हैं|
  2. जनसंख्या: प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाला जनसंख्या घनत्व दिल्ली में इतना अधिक है कि दिल्ली शहर वर्ग प्रतिकिलोमीटर अधिक कार्बन डाई ओक्साइड छोड़ता है| दिल्ली में घरेलू प्रदूषण करक गैस स्टोव, फ्रिज, कूड़ा, हीटर, वातानुकूलन, आदि का घनत्व भी काफ़ी अधिक है|
  3. कूड़ादान: दिल्ली कूड़े का प्रबंधन आजतक ठीक से नहीं कर पाती| यहाँ स्वच्छता का मतलब है किसी मैदान में पेड़ के सूखे पत्तों पर झाड़ू लगाते हुए फ़ोटो खींचना|
  4. जनयातायात साधन: दिल्ली वाले सरकार से यह नहीं पूछते कि बसें इतनी कम क्यों हैं? कॉलोनियों के अन्दर रिक्शे क्यों बंद हैं? मेट्रो का अंतराल कम क्यों हैं? दिल्लीपन में शरीफ़ दिल्ली वालों को मजबूर करता है कि दस हज़ार माहना से भी अधिक खर्चा अपने सर पर डालो और कार ले आओ, भले ही द्वार पर खड़ी रहे| सुरक्षा की संवैधानिक और सार्वभौमिक जिम्मेदारी भी सरकार का उत्तरदायित्व कम से कम दिल्ली में नहीं खड़ा करती|
  5. आस पड़ोस का प्रदूषण: दिल्ली को विकास चाहिए, दिल्ली को सुविधाएँ चाहिए मगर इस विकास की कीमत अदा करने की जिम्मेदारी झारखण्ड, छत्तीसगढ़, या कोई और पिछड़ा राज्य उठाये| मगर भाई प्रदूषण तो हवा के साथ आएगा ही| और विकास की मार झेलता हुया ग़रीब रोजगार की तलाश में दिल्ली ही तो भागेगा ही|

मगर कोई नहीं पूछता की वास्तविक क्या हैं, इनका क्या निदान है और उसमें खुद उसका क्या योगदान होगा और सरकार की अब तब और आगे की उत्तरदायिता क्या है?

खैर छोड़िये, प्रदूषण पर राजनीति करते हैं जब तक दिल्ली वाले खुद प्रदूषण से न मर जाएँ|

Advertisements

दिल्ली का प्रदूषण पर्व&rdquo पर एक विचार;

कृपया, अपने बहुमूल्य विचार यहाँ अवश्य लिखें...

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s